पदच्छेदः
| यौगंधरहरिद्रौ | यौगंधर–हरिद्र (२.२) |
| च | च (अव्ययः) |
| दैत्यप्रमथनौ | दैत्य–प्रमथन (२.२) |
| तथा | तथा (अव्ययः) |
| पित्र्यं | पित्र्य (२.१) |
| सौमनसं | सौमनस (२.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| विधूतमकराव् | विधूत–मकर (२.२) |
| उभौ | उभ् (२.२) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यौ | ग | न्ध | र | ह | रि | द्रौ | च |
| दै | त्य | प्र | म | थ | नौ | त | था |
| पि | त्र्यं | सौ | म | न | सं | चै | व |
| वि | धू | त | म | क | रा | वु | भौ |