पदच्छेदः
| वसिष्ठस्याश्रमपदं | वसिष्ठ (६.१)–आश्रम–पद (२.१) |
| नानापुष्पफलद्रुमम् | नाना (अव्ययः)–पुष्प–फल–द्रुम (२.१) |
| नानामृगगणाकीर्णं | नाना (अव्ययः)–मृग–गण–आकीर्ण (√आ-कृ + क्त, २.१) |
| सिद्धचारणसेवितम् | सिद्ध–चारण–सेवित (√सेव् + क्त, २.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | सि | ष्ठ | स्या | श्र | म | प | दं |
| ना | ना | पु | ष्प | फ | ल | द्रु | मम् |
| ना | ना | मृ | ग | ग | णा | की | र्णं |
| सि | द्ध | चा | र | ण | से | वि | तम् |