अन्वयः
सर्वदेवै: by all devatas, ऋषिभिश्च by rishis also, अभिष्टुत: extolled, महातेजा: exceedingly energetic, धर्मात्मा virtuous, विश्वामित्रस्तु Visvamitra, देवता: to devatas, बाढम् इत्येव so be it, आह said.
Summary
In this manner extolled by all devatas and rishis, mighty and righteous Viswamitra said, 'well let it be so'.
पदच्छेदः
| विश्वामित्रस् | विश्वामित्र (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| धर्मात्मा | धर्म–आत्मन् (१.१) |
| सर्वदेवैर् | सर्व–देव (३.३) |
| अभिष्टुतः | अभिष्टुत (√अभि-स्तु + क्त, १.१) |
| ऋषिभिश् | ऋषि (३.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| महातेजा | महत्–तेजस् (१.१) |
| बाढम् | बाढ (१.१) |
| इत्य् | इति (अव्ययः) |
| आह | आह (√अह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| देवताः | देवता (२.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| वि | श्वा | मि | त्र | स्तु | ध | र्मा | त्मा |
| स | र्व | दे | वै | र | भि | ष्टु | तः |
| ऋ | षि | भि | श्च | म | हा | ते | जा |
| बा | ढ | मि | त्या | ह | दे | व | ताः |