अन्वयः
महामुनौ when the mighty ascestic, तस्मिन् विश्वामित्रे that Visvamitra, सन्तप्यमाने while peforming penance, सुराणाम् for devatas, वासवस्य च for Indra also, सुमहान् greatly, संभ्रम: आसीत् perturbance over took.
Summary
When the mighty asetic Viswamitra was peforming penance, the gods as well as Indra got deeply perturbed.
पदच्छेदः
| तस्मिन् | तद् (७.१) |
| संतप्यमाने | संतप्यमान (√सम्-तप् + शानच्, ७.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| विश्वामित्रे | विश्वामित्र (७.१) |
| महामुनौ | महत्–मुनि (७.१) |
| सम्भ्रमः | सम्भ्रम (१.१) |
| सुमहान् | सु (अव्ययः)–महत् (१.१) |
| आसीत् | आसीत् (√अस् लङ् प्र.पु. एक.) |
| सुराणां | सुर (६.३) |
| वासवस्य | वासव (६.१) |
| च | च (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | स्मि | न्सं | त | प्य | मा | ने | तु |
| वि | श्वा | मि | त्रे | म | हा | मु | नौ |
| सं | भ्र | मः | सु | म | हा | ना | सी |
| त्सु | रा | णां | वा | स | व | स्य | च |