पदच्छेदः
| आपृच्छ्य | आपृच्छ्य (√आ-प्रच्छ् + ल्यप्) |
| पितरं | पितृ (२.१) |
| शूरो | शूर (१.१) |
| रामं | राम (२.१) |
| चाक्लिष्टकारिणम् | च (अव्ययः)–अक्लिष्ट–कारिन् (२.१) |
| मातॄंश् | मातृ (२.३) |
| चापि | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| नरश्रेष्ठः | नर–श्रेष्ठ (१.१) |
| शत्रुघ्नसहितो | शत्रुघ्न–सहित (१.१) |
| ययौ | ययौ (√या लिट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | पृ | च्छ्य | पि | त | रं | शू | रो |
| रा | मं | चा | क्लि | ष्ट | का | रि | णम् |
| मा | तॄं | श्चा | पि | न | र | श्रे | ष्ठः |
| श | त्रु | घ्न | स | हि | तो | य | यौ |