शीघ्रगस्य मरुः पुत्रो मरोः पुत्रः प्रशुश्रुकः ।
प्रशुश्रुकस्य पुत्रोऽभूदम्बरीषो महाद्युतिः ॥
शीघ्रगस्य मरुः पुत्रो मरोः पुत्रः प्रशुश्रुकः ।
प्रशुश्रुकस्य पुत्रोऽभूदम्बरीषो महाद्युतिः ॥
पदच्छेदः
| शीघ्रगस्य | शीघ्रग (६.१) |
| मरुः | मरु (१.१) |
| पुत्रो | पुत्र (१.१) |
| मरोः | मरु (६.१) |
| पुत्रः | पुत्र (१.१) |
| प्रशुश्रुकः | प्रशुश्रुक (१.१) |
| प्रशुश्रुकस्य | प्रशुश्रुक (६.१) |
| पुत्रो | पुत्र (१.१) |
| ऽभूद् | अभूत् (√भू प्र.पु. एक.) |
| अम्बरीषो | अम्बरीष (१.१) |
| महाद्युतिः | महत्–द्युति (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शी | घ्र | ग | स्य | म | रुः | पु | त्रो |
| म | रोः | पु | त्रः | प्र | शु | श्रु | कः |
| प्र | शु | श्रु | क | स्य | पु | त्रो | ऽभू |
| द | म्ब | री | षो | म | हा | द्यु | तिः |