अन्वयः
आर्तायां while in anguish, जनन्याम् mother, एवम् in this way, ब्रुवन्त्याम् while speaking, भरताग्रजः Bharata's elder brother, राघवः Rama, आसाद्य having approached, वसिष्ठस्य Vasistha, पादौ feet, जग्राह clasped.
Summary
While Rama's mother was uttering such words in anguish, Rama reached Vasistha and clasped his feet with reverence.
पदच्छेदः
| ब्रुवन्त्याम् | ब्रुवत् (√ब्रू + शतृ, ७.१) |
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| आर्तायां | आर्त (७.१) |
| जनन्यां | जननी (७.१) |
| भरताग्रजः | भरताग्रज (१.१) |
| पादाव् | पाद (२.२) |
| आसाद्य | आसाद्य (√आ-सादय् + ल्यप्) |
| जग्राह | जग्राह (√ग्रह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| वसिष्ठस्य | वसिष्ठ (६.१) |
| स | तद् (१.१) |
| राघवः | राघव (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ब्रु | व | न्त्या | मे | व | मा | र्ता | यां |
| ज | न | न्यां | भ | र | ता | ग्र | जः |
| पा | दा | वा | सा | द्य | ज | ग्रा | ह |
| व | सि | ष्ठ | स्य | स | रा | घ | वः |