अन्वयः
ततः then, श्रीमान् prosperous, अभिसत्कृतः wellhonoured, लक्ष्मणाग्रजः Lakshmana's elder brother, ज्ञातिमध्ये amidst his relatives, पुनः again, एवम् thus, ब्रुवाणम् speaking, भरतम् to Bharata, प्रत्युवाच replied.
Summary
Wellhonoured in the midst of relatives, the celebrated Rama, elder brother of Lakshmana, then said to Bharata who was going to speak again.
पदच्छेदः
| पुनर् | पुनर् (अव्ययः) |
| एवं | एवम् (अव्ययः) |
| ब्रुवाणं | ब्रुवाण (√ब्रू + शानच्, २.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| भरतं | भरत (२.१) |
| लक्ष्मणाग्रजः | लक्ष्मण–अग्रज (१.१) |
| प्रत्युवाच | प्रत्युवाच (√प्रति-वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| श्रीमाञ् | श्रीमत् (१.१) |
| ज्ञातिमध्ये | ज्ञाति–मध्य (७.१) |
| ऽतिसत्कृतः | अति (अव्ययः)–सत्कृत (√सत्-कृ + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| पु | न | रे | वं | ब्रु | वा | णं | तु |
| भ | र | तं | ल | क्ष्म | णा | ग्र | जः |
| प्र | त्यु | व | च | त | तः | श्री | मा |
| ञ्ज्ञा | ति | म | ध्ये | ऽति | स | त्कृ | तः |