पदच्छेदः
| आहृत्य | आहृत्य (√आ-हृ + ल्यप्) |
| च | च (अव्ययः) |
| समुद्रेभ्यः | समुद्र (५.३) |
| सर्वेभ्यो | सर्व (५.३) |
| वानरर्षभाः | वानर–ऋषभ (१.३) |
| अपः | अप् (२.३) |
| कनककुम्भेषु | कनक–कुम्भ (७.३) |
| निधाय | निधाय (√नि-धा + ल्यप्) |
| विमलाः | विमल (२.३) |
| शुभाः | शुभ (२.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | हृ | त्य | च | स | मु | द्रे | भ्यः |
| स | र्वे | भ्यो | वा | न | र | र्ष | भाः |
| अ | पः | क | न | क | कु | म्भे | षु |
| नि | धा | य | वि | म | लाः | शु | भाः |