पदच्छेदः
| महेन्द्रदत्तैः | महत्–इन्द्र–दत्त (√दा + क्त, ३.३) |
| श्रीमद्भिर् | श्रीमत् (३.३) |
| नीलजीमूतसंनिभैः | नील–जीमूत–संनिभ (३.३) |
| दिव्यपुष्पफलैर् | दिव्य–पुष्प–फल (३.३) |
| वृक्षैः | वृक्ष (३.३) |
| शीतच्छायैर् | शीत–छाया (३.३) |
| मनोरमैः | मनोरम (३.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | हे | न्द्र | द | त्तैः | श्री | म | द्भि |
| र्नी | ल | जी | मू | त | सं | नि | भैः |
| दि | व्य | पु | ष्प | फ | लै | र्वृ | क्षैः |
| शी | त | च्छा | यै | र्म | नो | र | मैः |