पदच्छेदः
| मन्दरस्य | मन्दर (६.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| ये | यद् (१.३) |
| कोटिं | कोटि (२.१) |
| संश्रिताः | संश्रित (√सम्-श्रि + क्त, १.३) |
| केचिद् | कश्चित् (१.३) |
| आयताम् | आयत (√आ-यम् + क्त, २.१) |
| कर्णप्रावरणाश् | कर्णप्रावरण (१.३) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| तथा | तथा (अव्ययः) |
| चाप्य् | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| ओष्ठकर्णकाः | ओष्ठकर्णक (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | न्द | र | स्य | च | ये | को | टिं |
| सं | श्रि | ताः | के | चि | दा | य | ताम् |
| क | र्ण | प्रा | व | र | णा | श्चै | व |
| त | था | चा | प्यो | ष्ठ | क | र्ण | काः |