पदच्छेदः
| चीनान् | चीन (२.३) |
| परमचीनांश् | परम–चीन (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| नीहारांश् | नीहार (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
| अन्विष्य | अन्विष्य (√अनु-इष् + ल्यप्) |
| दरदांश् | दरद (२.३) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| हिमवन्तं | हिमवन्त् (२.१) |
| विचिन्वथ | विचिनु (√वि-चि लोट् म.पु. )–अथ (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ची | ना | न्प | र | म | ची | नां | श्च |
| नी | हा | रां | श्च | पु | नः | पु | नः |
| अ | न्वि | ष्य | द | र | दां | श्चै | व |
| हि | म | व | न्तं | वि | चि | न्व | थ |