अन्वयः
दिव्यानाम् of wonderful, अगरूणाम् of incense, चन्दनानाम् of sandal, सञ्चयान् collections, शुचीनि pure, अभ्यवहार्याणि eatables, मूलानि च roots, फलानि च and fruits.
Summary
There they noticed a wonderful collection of incense and sandal, tasty and pure eatables, roots and fruits
पदच्छेदः
| कस्येमे | क (६.१)–इदम् (१.३) |
| काञ्चना | काञ्चन (१.३) |
| वृक्षास् | वृक्ष (१.३) |
| तरुणादित्यसंनिभाः | तरुण–आदित्य–संनिभ (१.३) |
| इमान्य् | इदम् (२.३) |
| अभ्यवहार्याणि | अभ्यवहार्य (√अभ्यव-हृ + कृत्, २.३) |
| मूलानि | मूल (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| फलानि | फल (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| क | स्ये | मे | का | ञ्च | ना | वृ | क्षा |
| स्त | रु | णा | दि | त्य | सं | नि | भाः |
| शु | ची | न्य | भ्य | व | हा | र्या | णि |
| मू | ला | नि | च | फ | ला | नि | च |