पदच्छेदः
| अशोकवनिकायां | अशोक–वनिका (७.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| तस्यां | तद् (७.१) |
| वानरपुंगवः | वानर–पुंगव (१.१) |
| स | तद् (१.१) |
| ददर्शाविदूरस्थं | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.)–अविदूर–स्थ (२.१) |
| चैत्यप्रासादम् | चैत्य–प्रासाद (२.१) |
| ऊर्जितम् | ऊर्जित (√ऊर्जय् + क्त, २.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | शो | क | व | नि | का | यां | तु |
| त | स्यां | वा | न | र | पुं | ग | वः |
| स | द | द | र्शा | वि | दू | र | स्थं |
| चै | त्य | प्रा | सा | द | मू | र्जि | तम् |