पदच्छेदः
| तन्मेरुशिखराकारं | तद् (२.१)–मेरु–शिखर–आकार (२.१) |
| निर्मितं | निर्मित (√निः-मा + क्त, २.१) |
| विश्वकर्मणा | विश्वकर्मन् (३.१) |
| बहुभिर् | बहु (३.३) |
| भूषितं | भूषित (√भूषय् + क्त, २.१) |
| हर्म्यैर् | हर्म्य (३.३) |
| मुक्तारजतसंनिभैः | मुक्ता–रजत–संनिभ (३.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | न्मे | रु | शि | ख | रा | का | रं |
| नि | र्मि | तं | वि | श्व | क | र्म | णा |
| ब | हु | भि | र्भू | षि | तं | ह | र्म्यै |
| र्मु | क्ता | र | ज | त | सं | नि | भौ |