पदच्छेदः
| यः | यद् (१.१) |
| स्थितं | स्थित (√स्था + क्त, २.१) |
| योजने | योजन (७.१) |
| शैलं | शैल (२.१) |
| गच्छन् | गच्छन् (√गम् लङ् प्र.पु. बहु.) |
| पार्श्वेन | पार्श्व (३.१) |
| सेवते | सेवते (√सेव् लट् प्र.पु. एक.) |
| ऊर्ध्वं | ऊर्ध्वम् (अव्ययः) |
| तथैव | तथा (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| कायेन | काय (३.१) |
| गतः | गत (√गम् + क्त, १.१) |
| प्राप्नोति | प्राप्नोति (√प्र-आप् लट् प्र.पु. एक.) |
| योजनम् | योजन (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यः | स्थि | तं | यो | ज | ने | शै | लं |
| ग | च्छ | न्पा | र्श्वे | न | से | व | ते |
| ऊ | र्ध्वं | त | थै | व | का | ये | न |
| ग | तः | प्रा | प्नो | ति | यो | ज | नम् |