पदच्छेदः
| पर्वतेषु | पर्वत (७.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| ये | यद् (१.३) |
| केचिद् | कश्चित् (१.३) |
| विषमेषु | विषम (७.३) |
| नदीषु | नदी (७.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| एते | एतद् (१.३) |
| त्वाम् | त्वद् (२.१) |
| अभिवर्तन्ते | अभिवर्तन्ते (√अभि-वृत् लट् प्र.पु. बहु.) |
| राजन्न् | राजन् (८.१) |
| ऋक्षाः | ऋक्ष (१.३) |
| सुदारुणाः | सु (अव्ययः)–दारुण (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | र्व | ते | षु | च | ये | के | चि |
| द्वि | ष | मे | षु | न | दी | षु | च |
| ए | ते | त्वा | म | भि | व | र्त | न्ते |
| रा | ज | न्नृ | ष्काः | सु | दा | रु | णाः |