ईहामृगमुखांश्चान्यान्व्यादितास्यान्भयावहान् ।
पञ्चास्याँल्लेलिहानांश्च ससर्ज निशिताञ्शरान् ॥
ईहामृगमुखांश्चान्यान्व्यादितास्यान्भयावहान् ।
पञ्चास्याँल्लेलिहानांश्च ससर्ज निशिताञ्शरान् ॥
अन्वयः
सिंहव्याघ्रमुखान् च अपि lion and tiger faces, कङ्ककाकमुखानपि buzzards and red geese faces, गृध्रश्येनमुखांश्चापि eagles and falcons faced, तथा in the same way, शृगालवदनान् jackals and wolves faces, ईहामृगमुखांश्चापि terrible with mouths wide open, व्यादितास्यान् to hurt, भयावहान् fearful, पञ्चास्यान् five headed, लेलिहानांश्च serpents, निशितान्sharp, शरान् arrows, ससर्ज releasedSummary
Arrows having lion and tiger face, buzzards and red geese face, eagles and falcons faced, in the same way arrows with jackals' face, wolves' face, terrible with mouth wide open five headed serpent like fearful sharp arrows were released by Ravana.पदच्छेदः
| ईहामृगमुखांश्चान्यान् | ईहामृग–मुख (२.३)–च (अव्ययः)–अन्य (२.३) |
| व्यादितास्यान् | व्यादित (√व्या-दा + क्त)–आस्य (२.३) |
| भयावहान् | भय–आवह (२.३) |
| पञ्चास्यांल्लेलिहानांश्च | पञ्चास्य (२.३)–लेलिहान (२.३)–च (अव्ययः) |
| ससर्ज | ससर्ज (√सृज् लिट् प्र.पु. एक.) |
| निशिताञ् | निशित (√नि-शा + क्त, २.३) |
| शरान् | शर (२.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ई | हा | मृ | ग | मु | खां | श्चा | न्या |
| न्व्या | दि | ता | स्या | न्भ | या | व | हान् |
| प | ञ्चा | स्या | ल्ले | लि | हा | नां | श्च |
| स | स | र्ज | नि | शि | ता | ञ्श | रान् |