पदच्छेदः
| ते | तद् (१.३) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| सुविक्रान्ता | सु (अव्ययः)–विक्रान्त (√वि-क्रम् + क्त, १.३) |
| दैतेया | दैतेय (१.३) |
| बलशालिनः | बल–शालिन् (१.३) |
| नानाप्रहरणास्तत्र | नाना (अव्ययः)–प्रहरण (१.३)–तत्र (अव्ययः) |
| प्रयुद्धा | प्रयुद्ध (√प्र-युध् + क्त, १.३) |
| युद्धदुर्मदाः | युद्ध–दुर्मद (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | तु | स | र्वे | सु | वि | क्रा | न्ता |
| दै | ते | या | ब | ल | शा | लि | नः |
| ना | ना | प्र | ह | र | णा | स्त | त्र |
| प्र | यु | द्धा | यु | द्ध | दु | र्म | दाः |