पदच्छेदः
| रुरोध | रुरोध (√रुध् लिट् प्र.पु. एक.) |
| दुःखं | दुःख (२.१) |
| जनयन्न् | जनयत् (√जनय् + शतृ, १.१) |
| अन्तःपुर | अन्तःपुर (७.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| स्त्रियः | स्त्री (२.३) |
| तस्मात् | तस्मात् (अव्ययः) |
| त्वां | त्वद् (२.१) |
| शरणं | शरण (२.१) |
| प्राप्ता | प्राप्त (√प्र-आप् + क्त, १.३) |
| वायुनोपहता | वायु (३.१)–उपहत (√उप-हन् + क्त, १.३) |
| विभो | विभु (८.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रु | रो | ध | दुः | खं | ज | न | य |
| न्न | न्तः | पु | र | इ | व | स्त्रि | यः |
| त | स्मा | त्त्वां | श | र | णं | प्रा | प्ता |
| वा | यु | नो | प | ह | ता | वि | भो |