पदच्छेदः
| प्रशंसार्हा | प्रशंसा–अर्ह (१.३) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| जानन्ति | जानन्ति (√ज्ञा लट् प्र.पु. बहु.) |
| प्रशंसां | प्रशंसा (२.१) |
| वक्तुम् | वक्तुम् (√वच् + तुमुन्) |
| ईदृशीम् | ईदृश (२.१) |
| आपृच्छामो | आपृच्छामः (√आ-प्रच्छ् लट् उ.पु. द्वि.) |
| गमिष्यामो | गमिष्यामः (√गम् लृट् उ.पु. द्वि.) |
| हृदिस्थो | हृदिस्थ (१.१) |
| नः | मद् (६.३) |
| सदा | सदा (अव्ययः) |
| भवान् | भवत् (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | शं | सा | र्हा | हि | जा | न | न्ति |
| प्र | शं | सां | व | क्तु | मी | दृ | शीम् |
| आ | पृ | च्छा | मो | ग | मि | ष्या | मो |
| हृ | दि | स्थो | नः | स | दा | भ | वान् |