पदच्छेदः
| तथा | तथा (अव्ययः) |
| बाणा | बाण (१.३) |
| विनिर्मुक्ताः | विनिर्मुक्त (√विनिः-मुच् + क्त, १.३) |
| शार्ङ्गान्नारायणेरिताः | शार्ङ्ग (५.१)–नारायण–ईरित (√ईरय् + क्त, १.३) |
| निर्धावन्तीषवस्तूर्णं | निर्धावन्ति (√निः-धाव् लट् प्र.पु. बहु.)–इषु (१.३)–तूर्णम् (अव्ययः) |
| शतशो | शतशस् (अव्ययः) |
| ऽथ | अथ (अव्ययः) |
| सहस्रशः | सहस्रशस् (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | था | बा | णा | वि | नि | र्मु | क्ताः |
| शा | र्ङ्गा | न्न | रा | य | णे | रि | ताः |
| नि | र्धा | व | न्ती | ष | व | स्तू | र्णं |
| श | त | शो | ऽथ | स | ह | स्र | शः |