पदच्छेदः
| दुःखेन | दुःख (३.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| सुसंतप्तः | सु (अव्ययः)–संतप्त (√सम्-तप् + क्त, १.१) |
| स्मृत्वा | स्मृत्वा (√स्मृ + क्त्वा) |
| तद् | तद् (२.१) |
| घोरदर्शनम् | घोर–दर्शन (२.१) |
| अवाङ्मुखो | अवाङ्मुख (१.१) |
| दीनमना | दीन–मनस् (१.१) |
| व्याहर्तुं | व्याहर्तुम् (√व्या-हृ + तुमुन्) |
| न | न (अव्ययः) |
| शशाक | शशाक (√शक् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ह | ह (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दुः | खे | न | च | सु | सं | त | प्तः |
| स्मृ | त्वा | त | द्घो | र | द | र्श | नम् |
| अ | वा | न्मु | खो | दी | न | म | ना |
| व्या | ह | र्तुं | न | श | शा | क | ह |