पदच्छेदः
| शरा | शर (१.३) |
| नानाविधाश्चापि | नानाविध (१.३)–च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| धनुर् | धनुस् (१.१) |
| आयतविग्रहम् | आयत (√आ-यम् + क्त)–विग्रह (१.१) |
| अनुव्रजन्ति | अनुव्रजन्ति (√अनु-व्रज् लट् प्र.पु. बहु.) |
| काकुत्स्थं | काकुत्स्थ (२.१) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| पुरुषविग्रहाः | पुरुष–विग्रह (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श | रा | ना | ना | वि | धा | श्चा | पि |
| ध | नु | रा | य | त | वि | ग्र | हम् |
| अ | नु | व्र | ज | न्ति | का | कु | त्स्थं |
| स | र्वे | पु | रु | ष | वि | ग्र | हाः |