अन्वयः
AI
यस्मात् माम् अवजानासि अतः मत्-प्रसूतिम् अनाराध्य ते प्रजा न भविष्यति इति सा त्वां शशाप।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अवजानासीति॥ यस्मात्कारणान्मामवजानासि तिरस्करोषि। अतः कारणान्मत्प्रसूतिं मम संततिमनाराध्यासेवयित्वा ते तव प्रजा न भविष्यतीति सा सुरभिस्त्वां शशाप।
शप आक्रोशे ॥
Summary
AI
She cursed you, saying, "Because you disregard me, you shall have no progeny until you have propitiated my offspring."
सारांश
AI
तब उसने शाप दिया कि मेरा अपमान करने के कारण, जब तक तुम मेरी संतान की सेवा नहीं करोगे, तुम्हें संतान प्राप्त नहीं होगी।
पदच्छेदः
AI
| अवजानासि | अवजानासि (अव√ज्ञा कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you disregard |
| माम् | अस्मद् (२.१) | me |
| यस्मात् | यद् (५.१) | because |
| अतः | अतः | therefore |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| न | न | not |
| भविष्यति | भविष्यति (√भू कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | will be |
| मत्प्रसूतिम् | मद्–प्रसूति (२.१) | my offspring |
| अनाराध्य | आराध्य (आ√राध्+ण्यत्+ल्यप्) | without propitiating |
| प्रजा | प्रजा (१.१) | offspring |
| इति | इति | thus |
| त्वां | युष्मद् (२.१) | you |
| शशाप | शशाप (√शप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | cursed |
| सा | तद् (१.१) | she (Surabhi) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | व | जा | ना | सि | मां | य | स्मा |
| द | त | स्ते | न | भ | वि | ष्य | ति |
| म | त्प्र | सू | ति | म | ना | रा | ध्य |
| प्र | जे | ति | त्वां | श | शा | प | सा |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.