क्वचित्प्रभा चान्द्रमसी तमोभि-
श्छायाविलीनैः शबलीकृतेव ।
अन्यत्र शुभ्रा शरदभ्रलेखा
रन्ध्रेष्विवालक्ष्यनभः प्रदेशा ॥
क्वचित्प्रभा चान्द्रमसी तमोभि-
श्छायाविलीनैः शबलीकृतेव ।
अन्यत्र शुभ्रा शरदभ्रलेखा
रन्ध्रेष्विवालक्ष्यनभः प्रदेशा ॥
श्छायाविलीनैः शबलीकृतेव ।
अन्यत्र शुभ्रा शरदभ्रलेखा
रन्ध्रेष्विवालक्ष्यनभः प्रदेशा ॥
अन्वयः
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क्वचित् छाया-विलीनैः तमोभिः शबलीकृता चान्द्रमसी प्रभा इव (भाति)। अन्यत्र रन्ध्रेषु अलक्ष्य-नभः-प्रदेशा शुभ्रा शरद्-अभ्र-लेखा इव (भाति)।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
हे अनवद्याङअगि! यमुनातरङ्गैर्भिन्नप्रवाहा व्यामिश्रौघा गङ्गा जाह्नवी विभाति। त्वं पशअय। केव? क्वचित्प्रदेशे प्रभया लिम्पन्ती संनिहितमिति प्रभालेपिभिरिन्द्रनीलैरनुविद्धा सह गुम्फिता मुक्तामयी यष्टिरिव हारावलिरिव विभाति। अन्यत्र प्रदेश इन्दीवरैर्नीलोत्पलैरुत्खचितान्तरा सह ग्रथिता सितपङ्कजानां पुण्डरीकाणां मालेव। विभातीति सर्वत्र संबन्धः। क्वचित्कादम्बसंसर्गवती नीलहंससंसृष्टा प्रियं मानसं नाम सरो येषां खगानां राजहंसानां पङ्क्तिरिव।
राजहंसास्तु ते चञ्चुचरणैर्लोहितैः सिताः इत्यमरः (अमरकोशः २.५.२६ ) । अन्यत्र कालागुरुणा दत्त पत्रा रचितमकरिकापत्रा भुवश्चन्दनकल्पिता भक्तिरिव। क्वचिच्छायासु विलीनैः स्थितैस्तमोभिः शबलीकृता कर्बुरीकृता चान्द्रमसी प्रभा चन्द्रिकेव। अन्यत्र रन्ध्रेष्वालक्ष्यनभःप्रदेशा शुभ्रा शरदभ्रलेखा शरन्मेघपङ्क्तिरिव। क्वचित्कृष्णोरगभूषणा भस्माङ्गरागेश्वरस्य तनुरिव विभाति। शेषो व्याख्यातः। कलापकम् ॥
Summary
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Somewhere, it looks like moonlight variegated by patches of darkness merged into shadows. Elsewhere, it appears like a white streak of autumn cloud, through the gaps of which patches of blue sky are faintly visible.
सारांश
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कहीं छाया मिश्रित चांदनी जैसी, तो कहीं शरद ऋतु के बादलों के बीच से दिखने वाले नीले आकाश जैसी यह गंगा-यमुना की धारा मनमोहक है।
पदच्छेदः
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| क्वचित् | क्वचित् | somewhere |
| प्रभा | प्रभा (१.१) | light |
| चान्द्रमसी | चान्द्रमस (१.१) | moonlight |
| तमोभिः | तमस् (३.३) | by darkness |
| छायाविलीनैः | छाया–विलीन (३.३) | merged in the form of shadows |
| शबलीकृता | शबलीकृत (√कृ+च्वि+क्त, १.१) | variegated |
| इव | इव | like |
| अन्यत्र | अन्यत्र | elsewhere |
| शुभ्रा | शुभ्र (१.१) | white |
| शरदभ्रलेखा | शरद्–अभ्र–लेखा (१.१) | a streak of autumn cloud |
| रन्ध्रेषु | रन्ध्र (७.३) | in the gaps |
| इव | इव | as if |
| आलक्ष्यनभःप्रदेशा | आलक्ष्य–नभस्–प्रदेश (१.१) | through which patches of sky are faintly visible |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क्व | चि | त्प्र | भा | चा | न्द्र | म | सी | त | मो | भि |
| श्छा | या | वि | ली | नैः | श | ब | ली | कृ | ते | व |
| अ | न्य | त्र | शु | भ्रा | श | र | द | भ्र | ले | खा |
| र | न्ध्रे | ष्वि | वा | ल | क्ष्य | न | भः | प्र | दे | शा |
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