हस्तेन हस्तं परिगृह्य वध्वाः
स राजसूनुः सुतरां चकासे ।
अनन्तराशोकलताप्रवालं
प्राप्येव चूतः प्रतिपल्लवेन ॥

अन्वयः AI सः राज-सूनुः वध्वाः हस्तम् हस्तेन परिगृह्य, प्रति-पल्लवेन अनन्तर-अशोक-लता-प्रवालम् प्राप्य चूतः इव, सुतराम् चकासे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) हस्तेनेति॥ स राजसूनुर्हस्तेन स्वकीयेन वध्वा हस्तं परिगृह्य। अनन्तरायाः संनिहिताया अशोकलतायाः प्रवालं पल्लवं प्रतिपल्लवेन स्वकीयेन प्राप्य चूत आम्र इव। सुतरां चकासे ॥
Summary AI That prince, taking the bride's hand in his, shone exceedingly, like a mango tree whose new shoot has joined with the tender sprout of a nearby Ashoka creeper.
सारांश AI राजकुमारी का हाथ थामे हुए राजकुमार अज वैसे ही सुशोभित हुए जैसे आम का वृक्ष अपने पल्लव से निकटवर्ती अशोक लता के नवीन अंकुर का स्पर्श कर रहा हो।
पदच्छेदः AI
हस्तेनहस्त (३.१) with his hand
हस्तम्हस्त (२.१) the hand
परिगृह्यपरिगृह्य (परि√ग्रह्+ल्यप्) having taken
वध्वाःवधू (६.१) of the bride
सःतद् (१.१) that
राजसूनुःराजन्सूनु (१.१) prince
सुतराम्सुतराम् exceedingly
चकासेचकासे (√काश् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) shone
अनन्तराशोकलताप्रवालम्अनन्तर–अशोक-लताप्रवाल (२.१) the sprout of a nearby Ashoka creeper
प्राप्यप्राप्य (प्र√आप्+ल्यप्) having obtained
इवइव like
चूतःचूत (१.१) a mango tree
प्रतिपल्लवेनप्रतिपल्लव (३.१) with its own new shoot
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
स्ते स्तं रि गृ ह्य ध्वाः
रा सू नुः सु रां का से
न्त रा शो ता प्र वा लं
प्रा प्ये चू तः प्र ति ल्ल वे
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