प्रायो विषाणपरिमोक्षलघूत्तमाङ्गा-
न्खङ्गांश्चकार नृपतिर्निक्षितैः क्षुरप्रैः ।
श्रृङ्गं स दृप्तविनयाधिकृतः परेषा-
मत्युच्छ्रितं न ममृषे न तु दीर्घमायुः ॥
प्रायो विषाणपरिमोक्षलघूत्तमाङ्गा-
न्खङ्गांश्चकार नृपतिर्निक्षितैः क्षुरप्रैः ।
श्रृङ्गं स दृप्तविनयाधिकृतः परेषा-
मत्युच्छ्रितं न ममृषे न तु दीर्घमायुः ॥
न्खङ्गांश्चकार नृपतिर्निक्षितैः क्षुरप्रैः ।
श्रृङ्गं स दृप्तविनयाधिकृतः परेषा-
मत्युच्छ्रितं न ममृषे न तु दीर्घमायुः ॥
अन्वयः
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नृपतिः निक्षितैः क्षुरप्रैः खड्गान् प्रायः विषाण-परिमोक्ष-लघु-उत्तमाङ्गान् चकार। सः दृप्त-विनय-अधिकृतः (सन्) परेषाम् अति-उच्छ्रितम् शृङ्गम् न ममृषे, दीर्घम् आयुः तु न (ममृषे इति न)।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
प्राय इति॥ नृपतिर्निशितैः क्षुरप्रैः शरविशेषैः खङ्गान् खङ्गाख्यान्मृगान्।
गण्डके खङ्गखङ्गिनौ इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.३१ ) । प्रायो बाहुल्येन विषाणपरिमोक्षेण शृङ्गभङ्गेन लघून्यगुरूण्युत्तमाङ्गानि शिरांसि येषां तांश्चकार। न त्ववधीदित्यर्थः। कुतः? दृप्तविनयाधिकृतो दुष्टनिग्रहनियुक्तः स राजा परेषां प्रतिकूलानामत्युच्छ्रितमुन्नतं श्रृङ्गं विषाणं प्राधान्यं च। शृङ्गं प्राधान्यसान्वोश्च इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.३१ ) । न ममृषे न सेहे। दीर्घमायुर्जीवितकालम्। आयुर्जीवितकालो ना इत्यमरः (अमरकोशः २.८.१२० ) । न ममृषे इति न। किंतु ममृष एवेत्यर्थः ॥
Summary
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With his sharp, crescent-headed arrows, the king often made the rhinoceroses' heads light by cutting off their horns. As one appointed to humble the proud, he could not tolerate the excessive eminence (horns) of others, but he did not take away their long lives.
सारांश
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राजा ने पैने बाणों से गेंडों के सींगों को काट दिया, जिससे उनके सिर हल्के हो गए। उन्होंने उनके अहंकार के प्रतीक ऊंचे सींगों को तो सहन नहीं किया, किंतु उनकी लंबी आयु का अंत नहीं किया।
पदच्छेदः
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| प्रायः | प्रायस् | Mostly |
| विषाणपरिमोक्षलघूत्तमाङ्गान् | विषाण–परिमोक्ष–लघु–उत्तमाङ्ग (२.३) | those whose heads were lightened by the removal of their horns |
| खड्गान् | खड्ग (२.३) | rhinoceroses |
| चकार | चकार (√कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | made |
| नृपतिः | नृपति (१.१) | the king |
| निक्षितैः | निक्षित (नि√क्षि+क्त, ३.३) | with sharpened |
| क्षुरप्रैः | क्षुरप्र (३.३) | crescent-shaped arrows |
| शृङ्गम् | शृङ्ग (२.१) | eminence/horn |
| सः | तद् (१.१) | he |
| दृप्तविनयाधिकृतः | दृप्त–विनय–अधिकृत (१.१) | who was appointed to humble the proud |
| परेषाम् | पर (६.३) | of others |
| अत्युच्छ्रितम् | अत्युच्छ्रित (२.१) | exceedingly high |
| न | न | not |
| ममृषे | ममृषे (√मृष् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | tolerated |
| न | न | not |
| तु | तु | but |
| दीर्घम् | दीर्घ (२.१) | long |
| आयुः | आयुस् (२.१) | life |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रा | यो | वि | षा | ण | प | रि | मो | क्ष | ल | घू | त्त | मा | ङ्गा |
| न्ख | ङ्गां | श्च | का | र | नृ | प | ति | र्नि | क्षि | तैः | क्षु | र | प्रैः |
| श्रृ | ङ्गं | स | दृ | प्त | वि | न | या | धि | कृ | तः | प | रे | षा |
| म | त्यु | च्छ्रि | तं | न | म | मृ | षे | न | तु | दी | र्घ | मा | युः |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
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