मृते तु तस्मिन्भरतो वसिष्ठप्रमुखैर्द्विजैः ।
नियुज्यमानो राज्याय नैच्छद्राज्यं महाबलः ।
स जगाम वनं वीरो रामपादप्रसादकः ॥
मृते तु तस्मिन्भरतो वसिष्ठप्रमुखैर्द्विजैः ।
नियुज्यमानो राज्याय नैच्छद्राज्यं महाबलः ।
स जगाम वनं वीरो रामपादप्रसादकः ॥
अन्वयः
तस्मिन् when he (Dasaratha), मृते had died, वसिष्ठप्रमुखै: द्विजै: with Vasishta and other brahmins, राज्याय to rule the kingdom, नियुज्यमान: had been ordered, महाबल: mighty, भरत: तु Bharata, राज्यम् kingdom, नैच्छत् did not desire to rule .M N Dutt
When king Dasaratha had passed away heaven, the mighty Bharata, although pressed by the Brāhmaṇas headed by Vasiştha, to rule the kingdom, did not wish for dominion. And that hero went the forest, with the view of propitiating Rāma.Summary
After Dasaratha had passed away, mighty Bharata did not desire to rule the kingdom against the orders by Vasishta and other brahmins.पदच्छेदः
| मृते | मृत (√मृ + क्त, ७.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| तस्मिन् | तद् (७.१) |
| भरतो | भरत (१.१) |
| वसिष्ठप्रमुखैर् | वसिष्ठ–प्रमुख (३.३) |
| द्विजैः | द्विज (३.३) |
| नियुज्यमानो | नियुज्यमान (√नि-युज् + शानच्, १.१) |
| राज्याय | राज्य (४.१) |
| नैच्छद् | न (अव्ययः)–ऐच्छत् (√इष् लङ् प्र.पु. एक.) |
| राज्यं | राज्य (२.१) |
| महाबलः | महत्–बल (१.१) |
| स | तद् (१.१) |
| जगाम | जगाम (√गम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| वनं | वन (२.१) |
| वीरो | वीर (१.१) |
| रामपादप्रसादकः | राम–पाद–प्रसादक (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मृ | ते | तु | त | स्मि | न्भ | र | तो | व | सि | ष्ठ | प्र |
| मु | खै | र्द्वि | जैः | नि | यु | ज्य | मा | नो | रा | ज्या | य |
| नै | च्छ | द्रा | ज्यं | म | हा | ब | लः | स | ज | गा | म |
| व | नं | वी | रो | रा | म | पा | द | प्र | सा | द | कः |