अब्रवीत्प्रश्रितं वाक्यं प्रसवार्थं द्विजोत्तमम् ।
यज्ञो मे क्रियतां विप्र यथोक्तं मुनिपुंगव ॥
अब्रवीत्प्रश्रितं वाक्यं प्रसवार्थं द्विजोत्तमम् ।
यज्ञो मे क्रियतां विप्र यथोक्तं मुनिपुंगव ॥
पदच्छेदः
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| प्रश्रितं | प्रश्रित (२.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| प्रसवार्थं | प्रसव–अर्थ (२.१) |
| द्विजोत्तमम् | द्विजोत्तम (२.१) |
| यज्ञो | यज्ञ (१.१) |
| मे | मद् (६.१) |
| क्रियतां | क्रियताम् (√कृ प्र.पु. एक.) |
| विप्र | विप्र (८.१) |
| यथोक्तं | यथोक्तम् (अव्ययः) |
| मुनिपुंगव | मुनि–पुंगव (८.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ब्र | वी | त्प्र | श्रि | तं | वा | क्यं |
| प्र | स | वा | र्थं | द्वि | जो | त्त | मम् |
| य | ज्ञो | मे | क्रि | य | तां | वि | प्र |
| य | थो | क्तं | मु | नि | पुं | ग | व |