पदच्छेदः
| मयापि | मद् (३.१)–अपि (अव्ययः) |
| सत्कृताः | सत्कृत (√सत्-कृ + क्त, १.३) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| यथार्हं | यथार्ह (२.१) |
| राजसत्तमाः | राजन्–सत्तम (१.३) |
| यज्ञियं | यज्ञिय (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| कृतं | कृत (√कृ + क्त, १.१) |
| राजन् | राजन् (८.१) |
| पुरुषैः | पुरुष (३.३) |
| सुसमाहितैः | सु (अव्ययः)–समाहित (३.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | या | पि | स | त्कृ | ताः | स | र्वे |
| य | था | र्हं | रा | ज | स | त्त | माः |
| य | ज्ञि | यं | च | कृ | तं | रा | ज |
| न्पु | रु | षैः | सु | स | मा | हि | तैः |