पदच्छेदः
| गणकाञ् | गणक (२.३) |
| शिल्पिनश् | शिल्पिन् (२.३) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| तथैव | तथा (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| नटनर्तकान् | नट–नर्तक (२.३) |
| तथा | तथा (अव्ययः) |
| शुचीञ् | शुचि (२.३) |
| शास्त्रविदः | शास्त्र–विद् (२.३) |
| पुरुषान् | पुरुष (२.३) |
| सुबहुश्रुतान् | सु (अव्ययः)–बहु–श्रुत (√श्रु + क्त, २.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ग | ण | का | ञ्शि | ल्पि | न | श्चै | व |
| त | थै | व | न | ट | न | र्त | कान् |
| त | था | शु | ची | ञ्शा | स्त्र | वि | दः |
| पु | रु | षा | न्सु | ब | हु | श्रु | तान् |