नियुक्तास्तत्र पशवस्तत्तदुद्दिश्य दैवतम् ।
उरगाः पक्षिणश्चैव यथाशास्त्रं प्रचोदिताः ।
शामित्रे तु हयस्तत्र तथा जल चराश्च ये ॥
नियुक्तास्तत्र पशवस्तत्तदुद्दिश्य दैवतम् ।
उरगाः पक्षिणश्चैव यथाशास्त्रं प्रचोदिताः ।
शामित्रे तु हयस्तत्र तथा जल चराश्च ये ॥
अन्वयः
तत्र there, यथाशास्त्रम् as per tradition, प्रचोदिता: prompted, पशव: animals, उरगा: serpants, पक्षिणश्चैव birds also, तत्तत् that respective, दैवतम् deity, उद्दिश्य intended for, नियुक्ता: were fastened.M N Dutt
That fire-place of that lion among kings, set by skilful Brāhmaṇas, consisting on three sides of eighteen bricks, looked like the goldenwinged Garuda. And for the purpose of sacrificing them to the respective deities were collect beasts and reptiles, and birds, and horses, and aquatic animals. And the priests sacrificed all these in proper form.Summary
Animals, serpents and birds were kept ready after the sastras intended (for sacrifice) for those respective deities.पदच्छेदः
| नियुक्तास् | नियुक्त (√नि-युज् + क्त, १.३) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| पशवस् | पशु (१.३) |
| तत् | तद् (२.१) |
| तद् | तद् (२.१) |
| उद्दिश्य | उद्दिश्य (√उत्-दिश् + ल्यप्) |
| दैवतम् | दैवत (२.१) |
| उरगाः | उरग (१.३) |
| पक्षिणश् | पक्षिन् (१.३) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| यथाशास्त्रं | यथाशास्त्रम् (अव्ययः) |
| प्रचोदिताः | प्रचोदित (√प्र-चोदय् + क्त, १.३) |
| शामित्रे | शामित्र (७.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| हयस् | हय (१.१) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| तथा | तथा (अव्ययः) |
| जलचराश् | जलचर (१.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| ये | यद् (१.३) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | यु | क्ता | स्त | त्र | प | श | व | स्त | त्त | दु | द्दि |
| श्य | दै | व | तम् | उ | र | गाः | प | क्षि | ण | श्चै | व |
| य | था | शा | स्त्रं | प्र | चो | दि | ताः | शा | मि | त्रे | तु |
| ह | य | स्त | त्र | त | था | ज | ल | च | रा | श्च | ये |