अन्वयः
महातेजाः man possessing heroic lustre, कुशाम्बस्तु Kushamba on his part, कौशाम्बीम् Kaushambi, पुरीम् city, अकरोत् constructed, धर्मात्मा righteous, कुशनाभस्तु Kushanabha on his part, महोदयम् Mahodaya, पुरम् city, चक्रे constructed.
Summary
The brilliant Kushamba and the righteous Kushanabha constructed the cities of Kaushanbi and Mahodaya (as their capital) respectively.
पदच्छेदः
| कुशाम्बस् | कुशाम्ब (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| महातेजाः | महत्–तेजस् (१.१) |
| कौशाम्बीम् | कौशाम्बी (२.१) |
| अकरोत् | अकरोत् (√कृ लङ् प्र.पु. एक.) |
| पुरीम् | पुरी (२.१) |
| कुशनाभस् | कुशनाभ (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| धर्मात्मा | धर्म–आत्मन् (१.१) |
| परं | पर (२.१) |
| चक्रे | चक्रे (√कृ लिट् प्र.पु. एक.) |
| महोदयम् | महोदय (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| कु | शा | म्ब | स्तु | म | हा | ते | जाः |
| कौ | शा | म्बी | म | क | रो | त्पु | रीम् |
| कु | श | ना | भ | स्तु | ध | र्मा | त्मा |
| प | रं | च | क्रे | म | हो | द | यम् |