अन्वयः
तत: thereafter, पितामहपुरोगमा: with Brahma in the forefront, सर्वे सुरगणा: hosts of devatas, महात्मानम् magnanimous, विश्वामित्रम् Visvamitra, मधुरम् sweet, वाक्यम् words, अब्रुवन् spoke.
Summary
Thereafter, with Brahma in the forefront, the gods spoke to Viswamitra in pleasing words:
पदच्छेदः
| विविशुर् | विविशुः (√विश् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| जाह्नवीतीरे | जाह्नवी–तीर (७.१) |
| शुचौ | शुचि (७.१) |
| मुदितमानसाः | मुदित (√मुद् + क्त)–मानस (१.३) |
| विश्वामित्रं | विश्वामित्र (२.१) |
| महात्मानं | महात्मन् (२.१) |
| परिवार्य | परिवार्य (√परि-वारय् + ल्यप्) |
| समन्ततः | समन्ततः (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| वि | वि | शु | र्जा | ह्न | वी | ती | रे |
| शु | चौ | मु | दि | त | मा | न | साः |
| वि | श्वा | मि | त्रं | म | हा | त्मा | नं |
| प | रि | वा | र्य | स | म | न्त | तः |