पदच्छेदः
| हास्यशृङ्गारकारुण्यरौद्रवीरभयानकैः | हास्य–शृङ्गार–कारुण्य–रौद्र–वीर–भयानक (३.३) |
| बीभत्सादिरसैर् | बीभत्सा–आदि–रस (३.३) |
| युक्तं | युक्त (√युज् + क्त, २.१) |
| काव्यम् | काव्य (२.१) |
| एतद् | एतद् (२.१) |
| अगायताम् | अगायताम् (√गा लङ् प्र.पु. द्वि.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| हा | स्य | शृ | ङ्गा | र | का | रु | ण्य |
| रौ | द्र | वी | र | भ | या | न | कैः |
| बी | भ | त्सा | दि | र | सै | र्यु | क्तं |
| का | व्य | मे | त | द | गा | य | ताम् |