अन्वयः
रघुनन्दन O Rama, अनेन by this penance, हर: Iswara, अत्यर्थम् immensely, तोषित: अभूत् was gratified, तत: afterwards, गङ्गाम् Ganga, बिन्दुसर: प्रति forming Bindusara, विससर्ज released (drop by drop).
Summary
O Son of the Raghus (Rama) Siva was immensely pleased with the penace and thereafter released Ganga (drop by drop) forming Bindusara.
पदच्छेदः
| अनेन | इदम् (३.१) |
| तोषितश् | तोषित (√तोषय् + क्त, १.१) |
| चासीद् | च (अव्ययः)–आसीत् (√अस् लङ् प्र.पु. एक.) |
| अत्यर्थं | अत्यर्थम् (अव्ययः) |
| रघुनन्दन | रघुनन्दन (८.१) |
| विससर्ज | विससर्ज (√वि-सृज् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| गङ्गां | गङ्गा (२.१) |
| हरो | हर (१.१) |
| बिन्दुसरः | बिन्दुसरस् (२.१) |
| प्रति | प्रति (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | ने | न | तो | षि | त | श्चा | सी |
| द | त्य | र्थं | र | घु | न | न्द | न |
| वि | स | स | र्ज | त | तो | ग | ङ्गां |
| ह | रो | बि | न्दु | स | रः | प्र | ति |