पदच्छेदः
| ब्रह्मर्षिगणसंकीर्णं | ब्रह्मर्षि–गण–संकीर्ण (√सम्-कृ + क्त, २.१) |
| देवर्षिगणसेवितम् | देवर्षि–गण–सेवित (√सेव् + क्त, २.१) |
| तपश्चरणसंसिद्धैर् | तपस्–चरण–संसिद्ध (√सम्-सिध् + क्त, ३.३) |
| अग्निकल्पैर् | अग्नि–कल्प (३.३) |
| महात्मभिः | महात्मन् (३.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ब्र | ह्म | र्षि | ग | ण | सं | की | र्णं |
| दे | व | र्षि | ग | ण | से | वि | तम् |
| त | प | श्च | र | ण | सं | सि | द्धै |
| र | ग्नि | क | ल्पै | र्म | हा | त्म | भिः |