पदच्छेदः
| वसिष्ठे | वसिष्ठ (७.१) |
| जपतां | जपत् (√जप् + शतृ, ६.३) |
| श्रेष्ठे | श्रेष्ठ (७.१) |
| तद् | तद् (१.१) |
| अद्भुतम् | अद्भुत (१.१) |
| इवाभवत् | इव (अव्ययः)–अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
| तानि | तद् (२.३) |
| सर्वाणि | सर्व (२.३) |
| दण्डेन | दण्ड (३.१) |
| ग्रसते | ग्रसते (√ग्रस् लट् प्र.पु. एक.) |
| ब्रह्मणः | ब्रह्मन् (६.१) |
| सुतः | सुत (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | सि | ष्ठे | ज | प | तां | श्रे | ष्ठे |
| त | द | द्भु | त | मि | वा | भ | वत् |
| ता | नि | स | र्वा | णि | द | ण्डे | न |
| ग्र | स | ते | ब्र | ह्म | णः | सु | तः |