अन्वयः
बद्ध: having been bound, स: मुनिपुत्रक: the son of sage, इन्द्रम् Indra, इन्द्रानुजं चैव Upendra, सुरौ two devatas, अग्य्राभि: with excellent, वाग्भि: words, यथावत् properly, अभितुष्टाव praised.
Summary
Thus bound, the son of the sage praised the two devatas, Indra and Upendra with moving words.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| बद्धो | बद्ध (√बन्ध् + क्त, १.१) |
| वाग्भिर् | वाच् (३.३) |
| अग्र्याभिर् | अग्र्य (३.३) |
| अभितुष्टाव | अभितुष्टाव (√अभि-स्तु लिट् प्र.पु. एक.) |
| वै | वै (अव्ययः) |
| सुरौ | सुर (२.२) |
| इन्द्रम् | इन्द्र (२.१) |
| इन्द्रानुजं | इन्द्रानुज (२.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| यथावन् | यथावत् (अव्ययः) |
| मुनिपुत्रकः | मुनि–पुत्रक (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | ब | द्धो | वा | ग्भि | र | ग्र्या | भि |
| र | भि | तु | ष्टा | व | वै | सु | रौ |
| इ | न्द्र | मि | न्द्रा | नु | जं | चै | व |
| य | था | व | न्मु | नि | पु | त्र | कः |