अयं सुरपते घोरो विश्वामित्रो महामुनिः ।
क्रोधमुत्स्रक्ष्यते घोरं मयि देव न संशयः ।
ततो हि मे भयं देव प्रसादं कर्तुमर्हसि ॥
अयं सुरपते घोरो विश्वामित्रो महामुनिः ।
क्रोधमुत्स्रक्ष्यते घोरं मयि देव न संशयः ।
ततो हि मे भयं देव प्रसादं कर्तुमर्हसि ॥
अन्वयः
सुरपते O Lord of devatas, अयम् महामुनि: this mighty ascetic, विश्वामित्र: Visvamitra, घोर: is a frightful person, देव O Lord, मयि in me, घोरम् fearful, क्रोधम् wrath, उत्सृजते will release, संशय: न no doubt, तत: for that reason, मे my, भयम् fear, देव O lord, प्रसादम् favour, कर्तुम् to do, अर्हसि behoves of you.Summary
'Lord of the devatas this mighty ascetic Viswamitra is a terrible person. He will ceratinly release on his dreadful anger (curse me). O Lord this is my apprehension. You should excuse me'.पदच्छेदः
| अयं | इदम् (१.१) |
| सुरपते | सुरपति (८.१) |
| घोरो | घोर (१.१) |
| विश्वामित्रो | विश्वामित्र (१.१) |
| महामुनिः | महत्–मुनि (१.१) |
| क्रोधम् | क्रोध (२.१) |
| उत्स्रक्ष्यते | उत्स्रक्ष्यते (√उत्-सृज् लृट् प्र.पु. एक.) |
| घोरं | घोर (२.१) |
| मयि | मद् (७.१) |
| देव | देव (८.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| संशयः | संशय (१.१) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| भयं | भय (१.१) |
| देव | देव (८.१) |
| प्रसादं | प्रसाद (२.१) |
| कर्तुम् | कर्तुम् (√कृ + तुमुन्) |
| अर्हसि | अर्हसि (√अर्ह् लट् म.पु. ) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | यं | सु | र | प | ते | घो | रो | वि | श्वा | मि | त्रो |
| म | हा | मु | निः | क्रो | ध | मु | त्स्र | क्ष्य | ते | घो | रं |
| म | यि | दे | व | न | सं | श | यः | त | तो | हि | मे |
| भ | यं | दे | व | प्र | सा | दं | क | र्तु | म | र्ह | सि |