अन्वयः
एवम् in this manner, ब्रुवाणम् speaking (Vasishta), जनक: Janaka, कृताञ्जलि: with folded palms, प्रत्युवाच replied, ते भद्रं safety to you, परिकीर्तितम् related, न: our, कुलम् genealogy, श्रोतुम् to listen, अर्हसि behoves of you.
Summary
Vasishta having thus described (the genealogy of Dasaratha) Janaka with folded hands rejoined, "Be blessed. Let me relate the genealogy of my race. Listen".
पदच्छेदः
| एवं | एवम् (अव्ययः) |
| ब्रुवाणं | ब्रुवाण (√ब्रू + शानच्, २.१) |
| जनकः | जनक (१.१) |
| प्रत्युवाच | प्रत्युवाच (√प्रति-वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| कृताञ्जलिः | कृताञ्जलि (१.१) |
| श्रोतुम् | श्रोतुम् (√श्रु + तुमुन्) |
| अर्हसि | अर्हसि (√अर्ह् लट् म.पु. ) |
| भद्रं | भद्र (१.१) |
| ते | त्वद् (४.१) |
| कुलं | कुल (२.१) |
| नः | मद् (६.३) |
| कीर्तितं | कीर्तित (√कीर्तय् + क्त, २.१) |
| परम् | पर (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | वं | ब्रु | वा | णं | ज | न | कः |
| प्र | त्यु | वा | च | कृ | ता | ञ्ज | लिः |
| श्रो | तु | म | र्ह | सि | भ | द्रं | ते |
| कु | लं | नः | की | र्ति | तं | प | रम् |