पदच्छेदः
| राजप्रवेशसुमुखैः | राजन्–प्रवेश–सुमुख (३.३) |
| पौरैर् | पौर (३.३) |
| मङ्गलवादिभिः | मङ्गल–वादिन् (३.३) |
| सम्पूर्णां | सम्पूर्ण (√सम्-पृ + क्त, २.१) |
| प्राविशद् | प्राविशत् (√प्र-विश् लङ् प्र.पु. एक.) |
| राजा | राजन् (१.१) |
| जनौघैः | जन–ओघ (३.३) |
| समलंकृताम् | समलंकृत (√समलं-कृ + क्त, २.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रा | ज | प्र | वे | श | सु | मु | खैः |
| पौ | रै | र्म | ङ्ग | ल | वा | दि | भिः |
| सं | पू | र्णां | प्रा | वि | श | द्रा | जा |
| ज | नौ | घैः | स | म | लं | कृ | ताम् |