पदच्छेदः
| मातृभ्यो | मातृ (४.३) |
| मातृकार्याणि | मातृ–कार्य (२.३) |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ + क्त्वा) |
| परमयन्त्रितः | परम–यन्त्रित (√यन्त्रय् + क्त, १.१) |
| गुरूणां | गुरु (६.३) |
| गुरुकार्याणि | गुरु–कार्य (२.३) |
| काले | काल (७.१) |
| काले | काल (७.१) |
| ऽन्ववैक्षत | अन्ववैक्षत (√अन्वव-ईक्ष् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मा | तृ | भ्यो | मा | तृ | का | र्या | णि |
| कृ | त्वा | प | र | म | य | न्त्रि | तः |
| गु | रू | णां | गु | रु | का | र्या | णि |
| का | ले | का | ले | ऽन्व | वै | क्ष | त |