एवं श्रेष्ठैर्गुणैर्युक्तः प्रजानां पार्थिवात्मजः ।
संमतस्त्रिषु लोकेषु वसुधायाः क्षमागुणैः ।
बुद्ध्या बृहस्पतेस्तुल्यो वीर्येणापि शचीपतेः ॥
एवं श्रेष्ठैर्गुणैर्युक्तः प्रजानां पार्थिवात्मजः ।
संमतस्त्रिषु लोकेषु वसुधायाः क्षमागुणैः ।
बुद्ध्या बृहस्पतेस्तुल्यो वीर्येणापि शचीपतेः ॥
अन्वयः
एवम् in this way, श्रेष्ठगुणैः with excellent qualities, युक्तः endowed, पार्थिवात्मजः son of the king, प्रजानाम् for his subjects, त्रिषु लोकेषु in the three worlds, सम्मतः was held in high esteem, क्षमागुणैः by the quality of forbearance, वसुधायाः by earth, बुद्ध्या by his intelligence, बृहस्पतेः with Brihaspati's, वीर्येण by prowess, शचीपतेः consort of Sachi (Indra), तुल्यः equal.Summary
Thus endowed with such excellent qualities, the subjects in the three worlds held him in high esteem. In forbearance he was like the earth, in wisdom like Brihaspati and in prowess like the consort of Sachi (Indra).पदच्छेदः
| एवं | एवम् (अव्ययः) |
| श्रेष्ठैर् | श्रेष्ठ (३.३) |
| गुणैर् | गुण (३.३) |
| युक्तः | युक्त (√युज् + क्त, १.१) |
| प्रजानां | प्रजा (६.३) |
| पार्थिवात्मजः | पार्थिव–आत्मज (१.१) |
| संमतस् | संमत (√सम्-मन् + क्त, १.१) |
| त्रिषु | त्रि (७.३) |
| लोकेषु | लोक (७.३) |
| वसुधायाः | वसुधा (६.१) |
| क्षमागुणैः | क्षमा–गुण (३.३) |
| बुद्ध्या | बुद्धि (६.१) |
| बृहस्पतेस् | बृहस्पति (६.१) |
| तुल्यो | तुल्य (१.१) |
| वीर्येणापि | वीर्य (३.१)–अपि (अव्ययः) |
| शचीपतेः | शचीपति (६.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | वं | श्रे | ष्ठै | र्गु | णै | र्यु | क्तः | प्र | जा | नां | पा |
| र्थि | वा | त्म | जः | सं | म | त | स्त्रि | षु | लो | के | षु |
| व | सु | धा | याः | क्ष | मा | गु | णैः | बु | द्ध्या | बृ | ह |
| स्प | ते | स्तु | ल्यो | वी | र्ये | णा | पि | श | ची | प | तेः |