अन्वयः
शङ्खणः Shankhana, इति thus, विश्रुतः is famous, कल्माषपादपुत्रः as son of Kalmashapada, अभूत् became, यः whoever, तद्वीर्यम् with that prowess, आसाद्य having been target acquired, सहसैन्यः with his army, व्यनीनशत् was destroyed.
Summary
Shankhana was the famous son of Kalmashapada. Whoever challenged his prowess was routed with his entire army.
पदच्छेदः
| कल्माषपादपुत्रो | कल्माषपाद–पुत्र (१.१) |
| ऽभूच् | अभूत् (√भू प्र.पु. एक.) |
| छङ्खणस् | शङ्खण (१.१) |
| त्व् | तु (अव्ययः) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| विश्रुतः | विश्रुत (√वि-श्रु + क्त, १.१) |
| यस् | यद् (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| तद् | तद् (२.१) |
| वीर्यम् | वीर्य (२.१) |
| आसाद्य | आसाद्य (√आ-सादय् + ल्यप्) |
| सहसेनो | सह (अव्ययः)–सेना (१.१) |
| व्यनीनशत् | व्यनीनशत् (√वि-नश् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| क | ल्मा | ष | पा | द | पु | त्रो | ऽभू |
| च्छ | ङ्ख | ण | स्त्वि | ति | वि | श्रु | तः |
| य | स्तु | त | द्वी | र्य | मा | सा | द्य |
| स | ह | से | नो | व्य | नी | न | शत् |