अन्वयः
महातेजाः highly powerful, राजर्षिसत्तमः the foremost of royal sages, रामः Rama, तम् to him (Bharata), उवाच said, तातः O dear one, भरत Bharata, किं कुर्वाणम् what have I done, माम् before me, प्रत्युपवेक्ष्यसि preventing me by lying down?
Summary
Rama, the foremost of royal sages and highly powerful said, 'Dear Bharata, what wrong have I done that you should prevent me by lying down in front of me?'
पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| महातेजा | महत्–तेजस् (१.१) |
| रामो | राम (१.१) |
| राजर्षिसत्तमाः | राजर्षि–सत्तम (८.३) |
| किं | क (२.१) |
| मां | मद् (२.१) |
| भरत | भरत (८.१) |
| कुर्वाणं | कुर्वाण (√कृ + शानच्, २.१) |
| तात | तात (८.१) |
| प्रत्युपवेक्ष्यसि | प्रत्युपवेक्ष्यसि (√प्रत्युप-विश् लृट् म.पु. ) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | मु | वा | च | म | हा | ते | जा |
| रा | मो | रा | ज | र्षि | स | त्त | माः |
| किं | मां | भ | र | त | कु | र्वा | णं |
| ता | त | प्र | त्यु | प | वे | क्ष्य | सि |