अन्वयः
भरतस्य Bharata's, विस्तीर्णा vast, सा चमूः that army, अनुयायिनी following, यानैश्च with carriages, शकटैश्चैव with carts, हयैः with horses, नागैश्च with elephants, पुनः again, निवृत्ता turned back towards Ayodhya.
Summary
The vast army of Bharata with all its carriages, carts, horses and elephants following him again turned back towards Ayodhya.
पदच्छेदः
| यानैश् | यान (३.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| शकटैश् | शकट (३.३) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| हयैर् | हय (३.३) |
| नागैश् | नाग (३.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| सा | तद् (१.१) |
| चमूः | चमू (१.१) |
| पुनर् | पुनर् (अव्ययः) |
| निवृत्ता | निवृत्त (√नि-वृत् + क्त, १.३) |
| विस्तीर्णा | विस्तीर्ण (√वि-स्तृ + क्त, १.१) |
| भरतस्यानुयायिनी | भरत (६.१)–अनुयायिन् (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| या | नै | श्च | श | क | टै | श्चै | व |
| ह | यै | श्ना | गै | श्च | सा | च | मूः |
| पु | न | र्नि | वृ | त्ता | वि | स्ती | र्णा |
| भ | र | त | स्या | नु | या | यि | नी |