अन्वयः
ततः then, भरतः Bharata, पित्रा by father, भ्रात्रा by brothers, विवर्जिताम् deserted, अयोध्याम् Ayodhya, दृष्ट्वा after seeing, दुःख सन्तप्तः consumed with grief, सारथिम् to the charioteer, इदम् these words, अब्रवीत् said.
Summary
On seeing the city of Ayodhya bereft of his father and brothers, Bharata, consumed with grief, said to the charioteer:
पदच्छेदः
| शृङ्गवेरपुराद् | शृङ्गवेर–पुर (५.१) |
| अयोध्यां | अयोध्या (२.१) |
| संददर्श | संददर्श (√सम्-दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ह | ह (अव्ययः) |
| भरतो | भरत (१.१) |
| दुःखसंतप्तः | दुःख–संतप्त (√सम्-तप् + क्त, १.१) |
| सारथिं | सारथि (२.१) |
| चेदम् | च (अव्ययः)–इदम् (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| शृ | ङ्ग | वे | र | पु | रा | द्भू | य |
| अ | यो | ध्यां | सं | द | द | र्श | ह |
| भ | र | तो | दुः | ख | सं | त | प्तः |
| सा | र | थिं | चे | द | म | ब्र | वीत् |