अन्वयः
सन्यासम् this trust, इमे वरपादुके these sacred sandals, इदं राज्यं च and this kingdom, अयोध्यां च and Ayodhya, राघवाय to Rama, दत्त्वा having given back, धूतपापः cleansed of the sin, भवामि च I shall become.
Summary
Restoring the sacred sandals, the kingdom and this city of Ayodhya held as a trust by me, I shall be cleansed of the sin.
पदच्छेदः
| राघवाय | राघव (४.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| संन्यासं | संन्यास (२.१) |
| दत्त्वेमे | दत्त्वा (√दा + क्त्वा)–इदम् (२.२) |
| वरपादुके | वर–पादुका (२.२) |
| राज्यं | राज्य (२.१) |
| चेदम् | च (अव्ययः)–इदम् (२.१) |
| अयोध्यां | अयोध्या (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| धूतपापो | धूत (√धू + क्त)–पाप (१.१) |
| भवामि | भवामि (√भू लट् उ.पु. ) |
| च | च (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| रा | घ | वा | य | च | सं | न्या | सं |
| द | त्त्वे | मे | व | र | पा | दु | के |
| रा | ज्यं | चे | द | म | यो | ध्यां | च |
| धू | त | पा | पो | भ | वा | मि | च |